शिक्षक दिवस पर विशेष
अभिवादन, आभार, अभिनंदन, वंदन...डॉ. शुक्ला सर
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(शिक्षक दिवस पर विशेष स्मरण)
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वैसे तो मुझे अपने मां-बाप के अलावा बहुत से शिक्षकों, गुरुओं, व्यक्तियों, व्यक्तित्वों से सीखने को मिला...किंतु मैं निजी तौर पर मानता हूं कि मेरे व्यक्तित्व के विकास में सबसे ज्यादा प्रभाव मेरे टीचर डॉ. वीके शुक्ला जी का रहा...मसलन सामाजिक सेवा के प्रति रुझान, अपनी कमजोरियों पर विजय पाना, कुछ नया करने के लिए एकला चलो की परिपाटी का अनुसरण, कम संसाधनों में भी ज्यादा से ज्यादा परिणाम प्राप्त करना, आलोचनाओं से विचलित नहीं होना, अपने लक्ष्य को पूर्ण किये बिना चैन से न बैठना, बिना संसाधनों के भी बड़े काम कर जाना, अपनी बातों पर दृढ़ रहना, सीखने की ललक बराबर बनाये रखना, टीम के रूप काम करने का अनिवार्य संयम, जिससे जो सीखने को मिले सीख लेना, खुद से ईमानदार रहना, किसी की मदद से पीछे नहीं हटना, सेल्फ डिसिपिलिन.....
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इसके अलावा प्रकृति से प्रेम, साहित्य से अनुराग, कविताओं की ग्राह्यता, शब्दों या गीतों से प्रेरणा...जितना लिखूंगा लिस्ट लम्बी ही होती जायेगी...एमएलके में पढ़ायी दौरान जो बुनियाद पड़ी...वो भविष्य में और परिष्कृत होती गयीं. ..एक विजन डेवेलप होता गया...जिससे जीवन, समाज, राष्ट्र व विश्व को समझने की दृष्टि मिली, दृष्टिकोण मिला...कैसा व्यक्ति बना, कैसा नागरिक बना...ये तो बाद मेरे...मेरे साथ के लोग, समाज के लोग या सहकर्मी बतायेंगे...
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मुझ अकिंचन को किसी योग्य बनाने के लिए मैं आज 'टीचर्स डे' के दिन डॉ. शुक्ला सर के प्रति दिल की गहराइयों से नतमस्तक हूं...मैं अपनी शुभकामनायें, अपनी कृतग्यता अर्पित करता हूं...
प्रणाम, अभिवादन, वंदन, अभिनंदन डॉ. शुक्ला सर...
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(शिक्षक दिवस पर विशेष स्मरण)
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वैसे तो मुझे अपने मां-बाप के अलावा बहुत से शिक्षकों, गुरुओं, व्यक्तियों, व्यक्तित्वों से सीखने को मिला...किंतु मैं निजी तौर पर मानता हूं कि मेरे व्यक्तित्व के विकास में सबसे ज्यादा प्रभाव मेरे टीचर डॉ. वीके शुक्ला जी का रहा...मसलन सामाजिक सेवा के प्रति रुझान, अपनी कमजोरियों पर विजय पाना, कुछ नया करने के लिए एकला चलो की परिपाटी का अनुसरण, कम संसाधनों में भी ज्यादा से ज्यादा परिणाम प्राप्त करना, आलोचनाओं से विचलित नहीं होना, अपने लक्ष्य को पूर्ण किये बिना चैन से न बैठना, बिना संसाधनों के भी बड़े काम कर जाना, अपनी बातों पर दृढ़ रहना, सीखने की ललक बराबर बनाये रखना, टीम के रूप काम करने का अनिवार्य संयम, जिससे जो सीखने को मिले सीख लेना, खुद से ईमानदार रहना, किसी की मदद से पीछे नहीं हटना, सेल्फ डिसिपिलिन.....
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इसके अलावा प्रकृति से प्रेम, साहित्य से अनुराग, कविताओं की ग्राह्यता, शब्दों या गीतों से प्रेरणा...जितना लिखूंगा लिस्ट लम्बी ही होती जायेगी...एमएलके में पढ़ायी दौरान जो बुनियाद पड़ी...वो भविष्य में और परिष्कृत होती गयीं. ..एक विजन डेवेलप होता गया...जिससे जीवन, समाज, राष्ट्र व विश्व को समझने की दृष्टि मिली, दृष्टिकोण मिला...कैसा व्यक्ति बना, कैसा नागरिक बना...ये तो बाद मेरे...मेरे साथ के लोग, समाज के लोग या सहकर्मी बतायेंगे...
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मुझ अकिंचन को किसी योग्य बनाने के लिए मैं आज 'टीचर्स डे' के दिन डॉ. शुक्ला सर के प्रति दिल की गहराइयों से नतमस्तक हूं...मैं अपनी शुभकामनायें, अपनी कृतग्यता अर्पित करता हूं...
प्रणाम, अभिवादन, वंदन, अभिनंदन डॉ. शुक्ला सर...


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