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Showing posts from September, 2018

शिक्षक दिवस पर विशेष

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अभिवादन, आभार, अभिनंदन, वंदन...डॉ. शुक्ला सर ----------------------------------------------------------------- (शिक्षक दिवस पर विशेष स्मरण) ---------------------------------------- वैसे तो मुझे अपने मां-बाप के अलावा बहुत से शिक्षकों, गुरुओं, व्यक्तियों, व्यक्तित्वों से सीखने को मिला...किंतु मैं निजी तौर पर मानता हूं कि मेरे व्यक्तित्व के विकास में सबसे ज्यादा प्रभाव मेरे टीचर डॉ. वीके शुक्ला जी का रहा...मसलन सामाजिक सेवा के प्रति रुझान, अपनी कमजोरियों पर विजय पाना, कुछ नया करने के लिए एकला चलो की परिपाटी का अनुसरण, कम संसाधनों में भी ज्यादा से ज्यादा परिणाम प्राप्त करना, आलोचनाओं से विचलित नहीं होना, अपने लक्ष्य को पूर्ण किये बिना चैन से न बैठना, बिना संसाधनों के भी बड़े काम कर जाना, अपनी बातों पर दृढ़ रहना, सीखने की ललक बराबर बनाये रखना, टीम के रूप काम करने का अनिवार्य संयम, जिससे जो सीखने को मिले सीख लेना, खुद से ईमानदार रहना, किसी की मदद से पीछे नहीं हटना, सेल्फ डिसिपिलिन..... ------------------------------------------------------------- --------------- इसके अलावा प्रकृ...

कैंसर से संघर्ष -1

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इलाज के दौरान की एक फोटो मैं भी नॉन हॉचकिन लिम्फोमा (एनएचएल) का शिकार बना... ------------------------------------------------------------------- (वर्ल्ड लिम्फोमा डे पर ) ------------------------------------------------------------------- इसमें कोई दो राय कैंसर से संघर्ष ने मेरे नजरिये, मेरी सोच को परिष्कृत किया...चीजों को देखने-समझने की क्षमता में इजाफा हुआ, नयापन आया...खासकर लोगों को माफ करना एवं छोटी से छोटी अच्छी चीज का ऊपरवाले व उस व्यक्ति के प्रति शुक्रिया करने का जज्बा आया...कोई व्यक्ति यदि आपके साथ अच्छा या उपकार कर रहा है तो वह उसका कर्तव्य नहीं है...हम स्वयं को इस लायक बनाते हैं कि लोग या समाज हमारी कमियों को नजरंदाज कर हमारी अच्छाई को याद रखें...ये अच्छे कार्य ही लोगों को आपके प्रति अच्छा करने को प्रेरित करते हैं...अगर आपका व्यवहार अच्छा नहीं होगा तो आप चाहे जितनी बड़ी पदवी पर हों, लोग आपका सम्मान नहीं करेंगे न ही आपके विषम समय में आपके साथ खड़े होंगे... ---------------------------------------------------------------- आसान है सकारात्मक रहने की सलाह देना, उपदेश देना...
खुशियों पर इतराना क्या कमियों पर घबराना क्या अपना क्या बेगाना क्या बात-बात चिल्लाना क्या नाकामी का भी जश्न मनाओ आखिर ग़म से डर जाना क्या सौ मर्जों की एक दवा बस गैरों को ग़म दिखलाना क्या गठरी दुख की भारी भरकम किस्मत का रोना-गाना क्या आज नहीं है, कल फिर होगा तेरी नेमत पर झल्लाना क्या यूं काम अधूरा छोड़ न भागूं मुश्किल वक्त है, डर जाना क्या तेरा साथ तो जीत है पक्की ग़म अंधड़ से घबराना क्या 'पीयूष' की आदत बड़ी निराली हंस-हंस दुख सह जाना क्या. ------------------------------------कुमार पीयूष                                         09.09.2018                                         बलरामपुर, उप्र