कैंसर से संघर्ष -1

इलाज के दौरान की एक फोटो
मैं भी नॉन हॉचकिन लिम्फोमा (एनएचएल) का शिकार बना...
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(वर्ल्ड लिम्फोमा डे पर )
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इसमें कोई दो राय कैंसर से संघर्ष ने मेरे नजरिये, मेरी सोच को परिष्कृत किया...चीजों को देखने-समझने की क्षमता में इजाफा हुआ, नयापन आया...खासकर लोगों को माफ करना एवं छोटी से छोटी अच्छी चीज का ऊपरवाले व उस व्यक्ति के प्रति शुक्रिया करने का जज्बा आया...कोई व्यक्ति यदि आपके साथ अच्छा या उपकार कर रहा है तो वह उसका कर्तव्य नहीं है...हम स्वयं को इस लायक बनाते हैं कि लोग या समाज हमारी कमियों को नजरंदाज कर हमारी अच्छाई को याद रखें...ये अच्छे कार्य ही लोगों को आपके प्रति अच्छा करने को प्रेरित करते हैं...अगर आपका व्यवहार अच्छा नहीं होगा तो आप चाहे जितनी बड़ी पदवी पर हों, लोग आपका सम्मान नहीं करेंगे न ही आपके विषम समय में आपके साथ खड़े होंगे...
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आसान है सकारात्मक रहने की सलाह देना, उपदेश देना...पर सच यही है कैंसर ट्रीटमेंट का दौर बड़ा पीड़ादायक होता है...खुद को तिल-तिल मरते देखने की प्रक्रिया बड़ी भयावह होती है जब तक डॉक्टर आपको ये विश्वास दिलाने में कामयाब नहीं होता कि आपका शरीर दवाओं को स्वीकार करने लगा है...आप तब इसे स्वीकार कर पाते हैं जब आपका इम्यून सिस्टम इसका संकेत करने लगता है...
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हां, ये सच है आपकी सकारात्मक सोच इससे जूझना में मदद करता है...परिवार व मित्रों का साथ बड़ा रोल अदा करता है...इससे बड़ा काम करता है यदि डॉक्टर आपको ये विश्वास दिलाने में कामयाब हो जाये कि कैंसर भी अन्य बीमारियों की तरह है और ठीक हो सकता है...ट्रीटमेंट शुरू करने में देरी व अच्छे डॉक्टर का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है....मैं लकी रहा कि मुझे डॉ. किशोर सिंह जैसा सकारात्मक सोच का डॉक्टर मिला, नई दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) की फैकल्टी....
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थैंक यू डॉ. किशोर सिंह...
थैंक यू एलएनजेपी हॉस्पिटल, जहां इलाज चला...थैंक्स सभी स्टाफ..
थैंक्स मेरे मित्रों, मेरे सहकर्मियों, सहयोगियों...
बचपन के दोस्तों, कॉलेज के दोस्तों...
थैंक्स मेरे भाई-बहनों व उनके परिजन
थैंक्स मेरा बच्चा अंशू (मेरा भतीजा) व उसका मित्र शिवांग मिश्रा...
थैंक्स मामा स्व. राष्ट्रगौरव जी...
थैंक्स मेरी शरीके-हयात, थैंक्स मेरे बच्चों...
थैंक्स मेरे मम्मी-पापा....
थैंक्स मेरे परिवार के सभी परिजन (घर, ननिहाल व ससुराल)
थैंक्स मेरे सभी अपने...जिन्होंने मुझे आर्थिक मदद की, मुझे दुआएं में याद रखा व मेरे लिये मंदिर में पूजा-प्रार्थना की, मस्जिद मे नमाजें पढ़ी, मजारों पर चादरें चढ़ाई, चर्च में कैंडिलें जलाई, गुरुद्वारों में अरदास की...
थैंक्स इमाकुलेट कानसेप्शन कॉन्वेंट स्कूल, लखनऊ (बच्चों का तत्कालीन स्कूल), थैंक्स प्रिंसिपल मैम सिस्टर लवानिया
थैंक्स यूथ हॉस्टल एसोसिएशन-यूनिट बलरामपुर
सभी की प्रार्थनाएं रंग लाई
थैंक्स मेरे भगवान, थैंक्स मेरे साई
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